नागपुर जाकर संघ प्रमुख को बताएंगे चतुर्थ एवं तृतीय श्रेणी के कर्मचारियों के साथ हो रहा अन्याय
नरेंद्र साहू छिंदवाड़ा
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छिंदवाड़ा। आल डिपार्टमेंट आउटसोर्स अस्थाई कर्मचारी संयुक्त मोर्चा के प्रदेश व्यापी आव्हान न्यूनतम वेतन के सवाल पर चल रहे आंदोलन के तहत दूसरे दिन फिर बड़ी संख्या में ग्राम पंचायत चौकीदारं, अस्थाई आउटसोर्स कर्मचारी राजू कुड़ापे, संतोष उईके, नेमीशरण वर्मा, राजेश वर्मा, कृष्णा मांजरीवार के नेतृत्व में रैली लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे और मुख्यमंत्री एवं श्रममंत्री के नाम कलेक्ट्रेट पहुंचकर ज्ञापन दिया गया।

संयुक्त मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष वासुदेव शर्मा के नेतृत्व में न्यूनतम वेतन के सवाल पर चलाए जा रहे आंदोलन में ग्राम पंचायतों से लेकर कलेक्ट्रेट, स्कूलों, छात्रावासों, बिजली विभाग, स्वास्थ्य विभाग, नगर निगम, दुग्ध संघ सहित ज्यादातर विभागों के कर्मचारी शामिल रहे।

ज्ञापन देकर कर्मियों ने मांग की कि पंचायतों में कार्यरत कर्मियों को न्यूनतम वेतन दिया जाए तथा बढ़े हुए न्यूनतम वेतन का आउटसोर्स कर्मियों को एरियर सहित भुगतान कराया जाए। कलेक्ट्रेट में मीडिया से बातचीत करते हुए वासुदेव शर्मा ने कहा कि छिंदवाड़ा सहित प्रदेश में चतुर्थ एवं तृतीय श्रेणी के कर्मचारियों के साथ व्यापक स्तर पर अन्याय हो रहा है, दो दिन कलेक्ट्रेट पर बैठने के बाद अब फरवरी में नागपुर जाकर आरएसएस प्रमुख मोहन भागवतजी को चतुर्थ एवं तृतीय श्रेणी कर्मचारियों के साथ हो रहा अन्याय बताएंगे और उनसे सरकारी विभागों का कंपनीकरण रुकवाने तथा पंचायती राज व्यवस्था को रोजगारन्मुखी बनाए रखने की मांग करेंगे।
कलेक्ट्रेट पहुंचने से पहले कर्मचारियों ने इंदिरा तिराहे पर धरना दिया, जिसमें बोलते हुए वासुदेव शर्मा ने कहा कि छिंदवाड़ा में पंचायती राज व्यवस्था धीरे-धीरे जमीदारी प्रथा में बदलती जा रही है, इसीलिए वहां काम करने वाले चौकीदारों, पंप आपरेटरों, भृत्य, सफाईकर्मियों से 2-3 हजार रुपए में काम कराया जा रहा है, ग्राम पंचायतों में ठीक वैसी ही स्थिति हो गई है जैसी आजादी से पहले जमीदारी प्रथा में हुआ करती थी, जिसमें काम करने वाले को तुच्छ सा मेहनताना दिया जाता था। शर्मा ने कहा कि आज गांव सबसे अधिक अन्याय के शिकार हैं और ग्रामीण जनता के बीच गरीबी बढ़ रही है, जिसका कारण है ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगारों का समाप्त हो जाना। मनरेगा लगभग ठप्प सी है, जिस कारण ग्रामीण मजदूरों को काम नहीं मिल रहा है और वे दूसरे जिलों में पलायन को मजबूर हैं, जिन्हें पंचायती राज के तहत काम मिला है, उन्हें 2-3 हजार रुपए दिए जा रहे हैं, वह भी सरपंच सचिव की मेहरबानी होने के बाद, इसी तरह मनरेगा में काम कराने वाले मेठों को भी किसी तरह का मासिक वेतन नहीं मिलता है, कुल मिलाकर कहें तो पंचायती राज व्यवस्था जमीदारी प्रथा में बदल चुकी है, इसीलिए अन्याय हो रहा है।
वासुदेव शर्मा ने कहा कि अन्याय सिर्फ ग्राम पंचायतों के कर्मचारियों के साथ ही नहीं हो रहा, दूसरे सरकारी विभागों में काम करने वाले आउटसोर्स, ठेका श्रमिक कर्मचारी भी इसी तरह के अन्याय के शिकार है। सरकारी विभागों का कंपनीकरण किया जा रहा है, तृतीय और चतुर्थ श्रेणी की सारी नौकरियां आउटसोर्स, अस्थाई की जा चुकी है, जिसमें भुखमरी का वेतन मिलता है और कभी भी नौकरी से निकाल दिया जाता है, जिस तेजी के साथ सरकारी विभागों का कंपनीकरण हो रहा है, उसे ऐसा लग रहा है कि सरकारी विभागों में सिर्फ अधिकारी सरकारी होंगे, बाकी सभी कर्मचारी ठेके वाले होंगे। शर्मा ने कहा कि 20 साल से मप्र में चतुर्थ श्रेणी के पदों पर भर्ती नहीं हुई, चपरासी, माली, ड्राईवर, चौकीदार, वार्डवाय, सफाईकर्मी की नौकरी सरकार ने नहीं दी है, इसी तरह सरकार के पास खुद का कंप्यूटर आपरेटर तक नहीं है, जबकि बिना कंप्यूटर आपरेटर के किसी भी विभाग में काम नहीं चल सकता है, इसी तरह सरकार ने चतुर्थ एवं तृतीय श्रेणी की नौकरियां ठेके पर देकर समाज के गरीब, मध्यमवर्गीय परिवारों को आर्थिक संकट में ढकेल दिया और उनके लिए सरकारी नौकरी के रास्ते पूरी तरह बंद किए जा चुके हैं, इसीलिए आज इस गंभीर समस्या पर सभी को मिलकर संघर्ष करना पड़ेगा, तभी सरकार को नौकरियां खत्म करने जैसे विनाशकारी रास्ते से वापस लौटाया जा सकता है। शर्मा ने कहा कि हमारा संगठन फरवरी में संघ प्रमुख मोहन भागवतजी से नागपुर जाकर मिलेगा और उनसे सरकारी विभागों के हो रहे कंपनीकरण को रुकवाने का आग्रह करेंगा।



